परिभाषा
- गुरुक्षेत्र ज्ञानमार्ग के समस्त प्रबुद्ध गुरुओं और ऋषियों की वह सूक्ष्म, आध्यात्मिक और सामूहिक उपस्थिति है जो साधक को सत्य के अनुसंधान में अदृश्य सहायता और सुरक्षा प्रदान करती है।
- यह केवल कोई भौतिक स्थान या आश्रम नहीं है, बल्कि हृदय में विराजित गुरु का वह सर्वव्यापी प्रभाव-क्षेत्र है जो अज्ञान का नाश करता है।
- विश्वस्मृति का वह भाग जहाँ ज्ञान संग्रहित है ।
मुख्य शिक्षाएं
- साधक जब श्रद्धा और निष्ठा के साथ एकांत में बैठकर श्रवण और मनन की साधना करता है, तब वह अपनी बुद्धि को जागृत करने के लिए गुरुक्षेत्र का आह्वान करता है।
- मनन की साधना के परिपक्व होने पर जब किसी भी गूढ़ प्रश्न का उत्तर स्वतः क्षण भर में भीतर से प्रकट होने लगता है, तो उसे गुरुक्षेत्र की ही असीम कृपा माना जाता है।
- गुरुक्षेत्र के प्रति पूर्ण समर्पण और कृतज्ञता का भाव साधक के चित्त को शुद्ध करता है और उसे भटकाव से बचाता है।
- इस पावन क्षेत्र की कृपा से साधक के मार्ग में आने वाले सभी मानसिक विघ्न, भ्रांतियां और अशुद्धियां स्वतः नष्ट हो जाती हैं।