परिभाषा
- ज्ञान प्रसार (या ज्ञानप्रसार) अपने द्वारा अनुभूत और सत्यापित किए गए सत्य को बिना किसी व्यावसायिक लोभ या स्वार्थ के जिज्ञासुओं और साधकों के कल्याण हेतु बाँटने की प्रक्रिया है।
- ज्ञानमार्ग पर इसे सबसे उत्कृष्ट 'ज्ञान सेवा' और गुरुजनों की असीम कृपा का स्वाभाविक परिणाम माना गया है।
मुख्य शिक्षाएं
- साधक के भीतर ज्ञान का उदय होने पर दूसरों के प्रति स्वतः ही करुणा का भाव जागृत होता है, जिससे वह ज्ञान के प्रसार (ज्ञानदानी बनने) के कार्य में प्रवृत्त होता है।
- ज्ञान प्रसार का मुख्य लक्ष्य दूसरों को भ्रामक मान्यताओं और अज्ञान के अंधकार से मुक्त करके मुक्ति (अज्ञान का नाश) का सीधा मार्ग दिखाना है।
- ज्ञानमार्ग के अंतर्गत ज्ञान प्रसारकों को प्रामाणिक रूप से प्रशिक्षित किया जाता है, ताकि वे सत्य को बिना किसी तोड़-मरोड़ के शुद्ध, सरल और सटीक भाषा में प्रस्तुत कर सकें।
- ज्ञानमार्ग की विशेषता है कि ज्ञान को न तो खरीदा जा सकता है और न बेचा जा सकता है; इसलिए ज्ञान प्रसार का संपूर्ण कार्य पूरी तरह से निःशुल्क और सेवा भाव पर आधारित होना चाहिए।