परिभाषा
- गुरुभाविता शिष्य के भीतर का वह विशिष्ट और उत्कृष्ट गुण है जिसमें वह न केवल गुरु के प्रति श्रद्धा रखता है, बल्कि उसमें स्वयं भी एक भावी प्रबुद्ध शिक्षक या गुरु बनने के लक्षण झलकने लगते हैं।
- यह शिष्य के भीतर ज्ञान की गहराई, निस्वार्थता और गुरु के समान आचरण के प्रकटीकरण की अवस्था है।
मुख्य शिक्षाएं
- गुरुभाविता का व्यावहारिक अर्थ यह है कि जो अभी योग्य शिष्य है, वह ज्ञानमार्ग पर अपनी तीव्र प्रगति के कारण भविष्य में स्वयं भी ज्ञान का प्रकाश फैलाने और गुरु बनने की क्षमता रखता है।
- ऐसा शिष्य जिसमें गुरुभाविता के लक्षण (जैसे अद्वितीय बुद्धि, आज्ञाकारिता, शुद्धता और निस्वार्थ प्रेम) दिखाई देते हैं, उसकी आध्यात्मिक प्रगति बहुत तीव्र हो जाती है।
- शिष्य गुरुभाविता के द्वारा गुरु की प्रज्ञा और शैली को आत्मसात करता है और दूसरों को अज्ञान से मुक्त करने के लिए स्वयं को तैयार करता है।
- यदि साधक में ज्ञान के प्रसार की सच्ची रुचि और निस्वार्थ भाव हो, तभी वह गुरुभाविता के गुण को पूर्णतः जाग्रत कर पाता है।