परिभाषा
- अनुभवों के इसी सुव्यवस्थित और अर्थपूर्ण संयोजन को ज्ञान कहा जाता है।
उदाहरण
भिन्न भिन्न अनुभवों में सम्बंध जोड़ना
ज्ञान है जैसे -
- सार ग्रहण - अनुभवों से सार निकालना, अवधारणा, मान्यता।
- विवेक - सही गलत, सत्य असत्य, नित्य अनित्य, दृष्टा दृश्य, ज्ञाता ज्ञान ज्ञेय आदि इनमें भेद जानना।
मुख्य शिक्षाएं
- चित्त में अनुभवों का संयोजन कई प्रकार के तार्किक संबंधों द्वारा होता है, जैसे नाम-रूप, कर्ता-कर्म, कारण-प्रभाव और विषय-वस्तु।
- बिना तार्किक संबंधों के केवल अनुभवों का होना ज्ञान नहीं कहलाता; जैसे नवजात शिशु को अनुभव तो होते हैं, पर उनके बीच तार्किक संबंध न होने के कारण ज्ञान नहीं होता।
- ज्ञानवृत्ति का मुख्य कार्य अनुभवों के बीच सुसंगत, सुंदर और तार्किक संबंध स्थापित करना है ताकि जीव के लिए आने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान लगाना संभव हो सके।
- यदि अनुभवों के बीच बने संबंध तार्किक और सुसंगत न हों, तो उन्हें ज्ञान नहीं बल्कि भ्रामक अज्ञान या अंधविश्वास कहा जाता है।
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