परिभाषा
- निर्गुण वह सत्ता या स्थिति है जो सभी प्रकार के प्राकृतिक गुणों, भौतिक-अभौतिक आकारों, सीमाओं और विकारों से सर्वथा रहित है।
- ज्ञानमार्ग के परम सत्य के मानदंड पर केवल अस्तित्व और अनुभवकर्ता (स्वयं) ही पूर्णतः निर्गुण हैं।
मुख्य शिक्षाएं
- दृश्य जगत में पाए जाने वाले सभी गुण (जैसे सुख-दुःख, अच्छा-बुरा, ठंडा-गर्म) वास्तव में केवल अनुभव की श्रेणी में आते हैं; अनुभवकर्ता स्वयं इनसे अछूता और निर्गुण रहता है।
- यदि अनुभवकर्ता में कोई भी प्राकृतिक गुण विद्यमान होता, तो वह परिवर्तनशील और नश्वर हो जाता; अतः नित्य और अचल होने के लिए उसका निर्गुण होना अनिवार्य है।
- निर्गुण का कोई भी सकारात्मक शाब्दिक विवरण संभव नहीं है, क्योंकि शब्द सीमाएं गढ़ते हैं; इसलिए इसकी व्याख्या केवल नेति-नेति (यह नहीं, वह नहीं) जैसी नकारात्मक विधि से ही की जा सकती है।
- सगुण रूप केवल माया के खेल के अंतर्गत प्रकट होता है, जिसका वास्तविक तत्व शून्यता ही है।