परिभाषा
- समाधान साधक की षट्सम्पत्ति के अंतर्गत आने वाला वह अनिवार्य गुण है जिसके प्रभाव से साधक सांसारिक प्रतिस्पर्धा और उतावलेपन से सर्वथा मुक्त होकर संतोषी स्वभाव से ज्ञान मार्ग पर प्रयासरत रहता है।
- बौद्धिक स्तर पर, यह बुद्धि की वह सर्वोच्च योग्यता है जो सभी विपरीत परिस्थितियों का तार्किक समाधान प्रस्तुत करती है।
मुख्य शिक्षाएं
- साधक के जीवन में समाधान का होना अत्यंत आवश्यक है; क्योंकि जब ज्ञान का उदय होता है और सिद्धियां सामने आती हैं, तो समाधान के बिना साधक उनके लोभ में फँसकर अपनी प्रगति रोक लेता है।
- समाधान बुद्धि की वह जटिल क्षमता है जिसमें ज्ञान, विचार, चयन, प्रज्ञा, तर्क, अंतःप्रज्ञा और निर्णय जैसी सभी बौद्धिक शक्तियों का एक साथ संतुलित उपयोग होता है।
- समाधान की अवस्था होने से साधक में शांति बनी रहती है और वह सांसारिक उतार-चढ़ाव, बाधाओं व विक्षेपों से विचलित हुए बिना निरंतर अपने लक्ष्य की ओर बढ़ता है।