परिभाषा
- साधक वृत्ति किसी जिज्ञासु का वह शांत, विवेकी, अनुशासित और खोजी दृष्टिकोण है जो उसे सत्य के निरंतर अनुसंधान और साधना में प्रवृत्त रखता है।
- यह जीव को सांसारिक प्रपंचों से ऊपर उठाकर सत्य के प्रति उन्मुख करने वाली मानसिक अवस्था है।
मुख्य शिक्षाएं
- साधक वृत्ति का मूल आधार तीव्र जिज्ञासा (जानने की तीव्र इच्छा) और मुमुक्षत्व (मुक्ति की गहरी उत्कंठा) है।
- इस वृत्ति में रहने वाला व्यक्ति किसी भी बात को आँख मूंदकर स्वीकार नहीं करता; वह निरंतर प्रश्नों, संशयों और प्रयोगों द्वारा सत्य को जाँचना अपना स्वभाव बना लेता है।
- साधक वृत्ति षटसम्पत्ति के गुणों (शम, दम, उपरति, तितिक्षा, श्रद्धा, समाधान) के सतत अभ्यास से पुष्ट होती है।
- इस वृत्ति के जागृत होने पर जीव में पशुवृत्ति और संकीर्ण सांसारिक प्रवृत्तियों (भोग विलास) का स्वतः ही शमन होने लगता है।