मनुष्य योनि


परिभाषा

  • मनुष्य योनि (या मनुष्य जीवन) विकासक्रम का वह सर्वोच्च पड़ाव है जहाँ जीव में विवेक, प्रज्ञा, रचनात्मकता और बुद्धि इस स्तर तक विकसित हो चुकी होती हैं कि वह अपने मूल अज्ञान को नष्ट करने में सक्षम हो जाता है।
  • यह जन्म का वह रूप है जिसमें आत्मज्ञान पूर्णतः संभव है।

मुख्य शिक्षाएं

  • सभी आध्यात्मिक प्रणालियों में मनुष्य योनि को सर्वश्रेष्ठ और दुर्लभ माना गया है, क्योंकि केवल इसी योनि में अज्ञान से सदा के लिए छूटने (मुक्ति) की संभावना होती है।
  • पशुओं का जीवन केवल उत्तरजीविता और इंद्रिय भोग तक सीमित होता है, जबकि मनुष्य योनि में जीव अपने संस्कारों और वासनाओं पर नियंत्रण स्थापित कर सकता है।
  • मनुष्य योनि का अंतिम और वास्तविक लक्ष्य इस योनि की सीमाओं और बंधनों से सदा के लिए मुक्त होकर निर्वाण प्राप्त करना है।
  • आत्मज्ञान होने पर साधक का विकासक्रम अत्यंत तीव्र हो जाता है, जिससे उसका मनुष्य जीवन छूट जाता है और जन्म-मृत्यु का सिलसिला सदा के लिए थम जाता है।

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