परिभाषा
- मान्यता (या मान्यताएं) किसी पूर्व-निर्धारित विचार, मत या भ्रामक निष्कर्ष को बिना किसी ठोस प्रमाण या सीधे अनुभव के सत्य मान लेने की मानसिक स्थिति है।
- ज्ञानमार्ग पर मान्यताओं को अज्ञान का ही मुख्य स्वरूप माना जाता है जो बुद्धि को सत्य देखने से रोकता है।
मुख्य शिक्षाएं
- मान्यताएं अज्ञान का सबसे बड़ा साधन हैं; क्योंकि वे अज्ञानी व्यक्ति को सत्य की वास्तविक खोज (जिज्ञासा) करने से रोक देती हैं और उसे यह दंभ देती हैं कि 'वह पहले से ही सब जानता है'।
- अहंकार और उत्तरजीविता की रक्षा के लिए जीव अपनी मान्यताओं को सत्य सिद्ध करने में लगा रहता है और सत्य सामने होते हुए भी उन्हें ही पकड़कर बैठा रहता है।
- ज्ञानमार्ग का मूल उद्देश्य किसी नई मान्यता को थोपना नहीं है, बल्कि चित्त में संचित सभी पुरानी मान्यताओं, अंधविश्वासों और मतारोपणों का समूल नाश करना है।
- साधक को अपनी समस्त मान्यताओं की कठोरता से अपरोक्ष अनुभव और तर्क द्वारा परीक्षा करके उन्हें नष्ट कर देना चाहिए।