सूक्ष्म अवस्था


परिभाषा

  • यह वह अवस्था है जहाँ बाह्य स्थूल इंद्रियाँ शिथिल हो जाती हैं, परंतु आंतरिक मानसिक इंद्रियाँ पूरी तरह सक्रिय रहकर कल्पित या स्मृति-आधारित अनुभवों की रचना करती हैं।

मुख्य शिक्षाएं

  • सूक्ष्म अवस्था का सबसे चिर-परिचित उदाहरण स्वप्न है, जहाँ मन बाह्य इंद्रियों के बिना ही पूरे दृश्य, शरीर और संबंधों का सृजन करके उनका अनुभव करता है।
  • इसके अंतर्गत ध्यान, भावना, और विशिष्ट योगिक-तांत्रिक प्रयोगों द्वारा प्राप्त होने वाले असाधारण सूक्ष्म अनुभव भी आते हैं।
  • ज्ञानमार्ग के अनुसार, सूक्ष्म अवस्था के सभी अनुभव भी परिवर्तनशील और क्षणभंगुर होने के कारण असत्य (मिथ्या) ही हैं।
  • साधक को सूक्ष्म अवस्था के कौतुक और चमत्कारों में आसक्त न होकर केवल उनके साक्षी (अनुभवकर्ता) के रूप में स्थित रहना चाहिए।

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