अवस्था


परिभाषा

  • चित्त में होने वाली विभिन्न गतिविधियां ही अवस्थाओं को जन्म देती हैं, जो कि निरंतर बदलती रहती हैं।

मुख्य शिक्षाएं

  • जागृत अवस्था में इंद्रियां और बुद्धि सक्रिय रहती हैं और बाह्य जगत एवं शरीर का अनुभव कराती हैं।
  • स्वप्न अवस्था में बाह्य इंद्रियां शिथिल होती हैं और चित्त मानसिक रचनाओं एवं कल्पनाओं का अनुभव कराता है।
  • निद्रा (सुषुप्ति) अवस्था में सभी प्रकार के बाह्य और आंतरिक अनुभवों का अभाव होता है, जहां अज्ञान और ज्ञान दोनों से क्षणिक मुक्ति मिलती है।
  • अवस्थाएं निरंतर बदलती रहती हैं, इसलिए वे असत्य (मिथ्या) हैं। अनुभवकर्ता एकमात्र नित्य और स्थायी तत्व है जो सभी अवस्थाओं का साक्षी है।

देखें


Edit This Article History