परिभाषा
- यह समाधि की वह अवस्था है जहां अनुभव और अनुभवकर्ता में भेद नहीं रहता।
मुख्य शिक्षाएं
- अद्वैतावस्था ब्रह्मज्ञान और आत्मज्ञान का परिणाम है जब अज्ञान पूर्ण रूप से दूर हो जाता है।
- इस अवस्था में कोई 'मैं' और 'तू' नहीं रहता केवल एकता है।
- जीवनमुक्त इस अवस्था में रहते हैं - शरीर में रहते हुए भी मुक्त।