परिभाषा
- तंत्र (या तकनीक) प्राकृतिक नियमों और शक्तियों के प्रयोगात्मक व व्यावहारिक अनुप्रयोग द्वारा इच्छाओं की पूर्ति का साधन है।
- ज्ञानमार्ग के पदानुक्रम में, तंत्र इच्छापूर्ति और वासनापूर्ति का एक विशिष्ट मार्ग है जो विज्ञान और प्रद्योगिकी के मूल में स्थित है।
तंत्र की स्थिति
- कुछ विद्वानों ने तंत्र को ज्ञानमार्ग का एक सहायक मार्ग माना है जो माया को समझने में उपयोगी है । किंतु यह पूरी तरह उसके प्रयोग पर निर्भर है ।
- इस मार्ग का अन्य मार्गो की तुलना में दुरुपयोग अधिक हुआ है इसलिए इसे गुप्त रखा गया है और सुपात्र को ही इसकी शिक्षा दी जाती है ।
- अज्ञानवश तंत्र , सिद्धियों, विचित्र अनुभवों आदि को ही अध्यात्म मान लिया जाता है । जिससे शिष्य की प्रगति नहीं होती ।
मुख्य शिक्षाएं
- तंत्र की प्रविधि (तकनीक) का उपयोग करने के लिए संपूर्ण तत्वज्ञान का होना आवश्यक नहीं है; जैसे दो पत्थरों को रगड़कर आग पैदा करने की तकनीक के पीछे का वैज्ञानिक कारण जाने बिना भी आग का उपयोग किया जा सकता है।
- तांत्रिक को अपनी इच्छाएं प्रिय होती हैं और वह सभी इच्छाओं को प्रकृति (देवी) का प्रसाद समझकर ग्रहण करता है। शक्तियों और वासनाओं के लोभ के कारण यह सबसे कठिन और जोखिम भरा मार्ग माना जाता है।
- आधुनिक विज्ञान मूलतः तंत्र (तकनीक) से ही निकला है, जिसका मुख्य उद्देश्य मनुष्य के भौतिक और सांसारिक जीवन को सुगम, सुरक्षित और आरामदायक बनाना है।
- यद्यपि तंत्र के शारीरिक, मानसिक और भौतिक स्तर पर अनेक लाभ हैं, परंतु यह पूर्ण ज्ञान या परम मुक्ति होने का अंतिम प्रमाण नहीं होता; मुक्ति केवल अज्ञान के नाश से ही संभव है।