प्रतिरोध (संस्कृत: प्रतिरोध) ज्ञान का विरोध करने की मन की प्रवृत्ति है। यह अज्ञान का एक रूप है — साधक जब सत्य के करीब पहुंचता है तब अहंकार प्रतिरोध करता है।
मुख्य शिक्षाएं
प्रतिरोध अहंकार की रक्षा प्रणाली है — वह अपने अस्तित्व को खतरे में देखता है।
ज्ञानमार्ग पर प्रतिरोध स्वाभाविक है — सत्य को सुनने में मन को कष्ट होता है।