परिभाषा
- समय (या काल) चित्त द्वारा गढ़ी गई वह मानसिक धारणा या परिकल्पना है जो अनुभवों के परिवर्तन और उनकी तुलना के आधार पर समय का अनुमान लगाती है।
- ज्ञानमार्ग के अनुसार, अस्तित्व और अनुभवकर्ता पूर्णतः समयहीन (कालातीत) हैं।
मुख्य शिक्षाएं
- समय स्वतंत्र रूप से अस्तित्व में नहीं है; बल्कि समय स्वयं अस्तित्व और अनुभवकर्ता के भीतर प्रकट होने वाली केवल एक मानसिक घटना या अनुभव मात्र है।
- भूत, वर्तमान और भविष्य की पूरी श्रृंखला केवल वर्तमान क्षण में ही अनुभूत होती है। भूतकाल केवल स्मृति है और भविष्य केवल कल्पना/अनुमान है, जो दोनों हमेशा वर्तमान में ही घटित होते हैं।
- अस्तित्व और अनुभवकर्ता का न तो कोई आदि (आरंभ) है और न ही अंत, क्योंकि उनके होने की गणना करने वाला समय स्वयं उनके भीतर कल्पित होता है; अतः वे नित्य हैं।
- सभी दृश्य और परिवर्तनशील घटनाएं समय के अधीन होकर असत्य (मिथ्या) सिद्ध होती हैं, जबकि अचल अनुभवकर्ता समय के भी परे का अंतिम दृष्टा है।