स्मृति


परिभाषा

  • स्मृति वह अर्धस्थायी नादरचना है जो इंद्रियों से प्राप्त होने वाले अनुभवों के छापों (संस्कारों) को संचित रखने और उन्हें पुनः प्रस्तुत करने की क्षमता रखती है।
  • यह संपूर्ण अनुभवों, संबंधों और सांसारिक ज्ञान का मूल आधार है।

मुख्य शिक्षाएं

  • स्मृति ही संपूर्ण अनुभवों और ज्ञान का आधार है; यदि स्मृति न हो तो न तो कोई तार्किक संबंध बन पाएंगे और न ही किसी अनुभव का कोई अर्थ स्पष्ट होगा।
  • यह स्मृति ही है जो नश्वर अनुभवों में स्थायित्व का भ्रम पैदा करती है और समय (काल) व स्थान की कल्पित धारणाओं को जन्म देती है।
  • स्मृति दो प्रकार की होती है: १. जीवस्मृति (जो व्यक्तिगत होती है और उत्तरजीविता के काम आती है), और २. विश्वस्मृति (जो संपूर्ण ब्रह्मांड की नादरचनाओं का अनंत संग्रह है)।
  • अनुभवकर्ता स्वयं स्मृति के भीतर नहीं पाया जाता; वह स्मृति की सभी परतों और उसमें होने वाली गतिविधियों का सर्वथा निरपेक्ष साक्षी है।

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