परिभाषा
- समाधि का यथार्थ अर्थ है-सम और धी (बुद्धि का समरूप हो जाना)। जब ध्यान और धारणा अपनी चरम सीमा पर पहुँचते हैं, तब चित्त की वृत्तियों का पूर्ण निरोध होकर जो अत्यंत संतुलित और अचल स्थिति बनती है, उसे समाधि कहते हैं।
मुख्य शिक्षाएं
- समाधि कोई सांसारिक अनुभव नहीं है; बल्कि यह स्वयं अनुभवकर्ता की वह शुद्धतम स्थिति है जहाँ चित्त की समस्त भ्रामक और विक्षेपित वृत्तियाँ शांत हो जाती हैं।
- सविकल्प समाधि जागृत या स्वप्न अवस्था में होती है जहाँ चेतना तो रहती है पर थोड़े बहुत वृत्तियों के संस्कार (बीज) बने रहते हैं।
- निर्विकल्प समाधि (योगनिद्रा) में कोई भेद नहीं रहता; यहाँ अनुभव, अनुभवकर्ता और अनुभवक्रिया का संपूर्ण भेद मिट जाता है और केवल शून्यता का अखंड बोध रहता है।
- सहज समाधि वह परम अवस्था है जहाँ समाधि की यह अखंड शांति और एकता का बोध दैनिक जीवन के व्यवहारों में भी बिना किसी प्रयास के स्वतः ही बना रहता है।