परिभाषा
- सूक्ष्म शरीर चित्त की उन आंतरिक और अभौतिक परतों का सुव्यवस्थित संगठन है जो मन, बुद्धि, अहम् और इंद्रियों की सूक्ष्म क्षमताओं से बना है।
- यह स्वप्न, ध्यान और चेतना की सूक्ष्म अवस्थाओं का मुख्य आधार है।
मुख्य शिक्षाएं
- सूक्ष्म शरीर स्थूल शरीर की सीमाओं से परे स्वतंत्र रूप से (जैसे स्वप्न या विशिष्ट ध्यान प्रयोगों में) कार्य करने में सक्षम है।
- अज्ञानी जीव सूक्ष्म शरीर की गतिविधियों और उसमें होने वाली अनुभूतियों को ही अपना सत्य स्वरूप मान बैठता है, जो कि गंभीर अज्ञान है।
- यह शरीर भी अनुभव की श्रेणी में आने के कारण केवल एक अनुभव (दृश्य) है; यह वास्तविक अनुभवकर्ता (साक्षी) नहीं है।
- साधना और ध्यान के द्वारा सूक्ष्म शरीर की इंद्रियों को जागृत किया जा सकता है, जिससे विभिन्न सूक्ष्म लोकों और सूक्ष्म प्रक्रियाओं का ज्ञान होता है।