अहम्


परिभाषा

  • अहम् (या 'मैं' की भावना) चित्त की एक ऐसी वृत्ति या परत है जो अनुभवों को अपना मानकर उनके साथ तादात्म्य स्थापित करती है।

मुख्य शिक्षाएं

  • अहम् की स्थिति निरंतर बदलती रहती है (अहम् की घड़ी) - कभी यह शरीर को, कभी मन को, कभी संबंधों को तो कभी वस्तुओं को 'मैं' या 'मेरा' कहता है।
  • अहम् का मुख्य कार्य जीव की उत्तरजीविता सुनिश्चित करना है; इसके बिना शरीर और संसार का व्यवहार नहीं चल सकता।
  • अहम् स्वयं परिवर्तनशील होने के कारण असत्य (मिथ्या) है।
  • आत्मज्ञान होने पर जब अहम् का संबंध शरीर-मन से हटकर अनुभवकर्ता पर स्थिर होता है, तब अहम् का विसर्जन (अहंनाश) हो जाता है और वास्तविक स्वरूप प्रकट होता है।

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