परिभाषा
- स्वभाव (स्व + भाव = अपना होना) किसी भी वस्तु, जीव या सत्ता के 'होने का मूल भाव' या उसका अनिवार्य लक्षण है जो कभी नहीं बदलता।
- यह उस तत्व की न्यूनतम परिभाषा है जिससे उसका अस्तित्व संभव है।
मुख्य शिक्षाएं
- अनुभवकर्ता (स्वयं) का वास्तविक स्वभाव अखंड शांति, निर्गुणता, निष्कपटता और आनंद है; इसके विपरीत सुख-दुःख चित्त की वृत्तियाँ हैं जो आती-जाती हैं।
- अनुभव का अनिवार्य स्वभाव निरंतर परिवर्तनशीलता और नश्वरता है; जो बदलता नहीं वह अनुभव नहीं हो सकता।
- साधक का लक्ष्य सांसारिक बनावटी आचरणों को छोड़कर अपने इसी शांत और अचल सत्य स्वभाव में सदा स्थित (निदिध्यासन) रहना है।