परिभाषा
- शून्यता (या शून्य) अस्तित्व और अनुभवकर्ता का वह मूल तत्व है जो किसी भी भौतिक या अभौतिक पदार्थ से निर्मित नहीं है।
- यह पूर्ण अभाव नहीं है, बल्कि समस्त नादरचनाओं, संभावनाओं और सृजन का अनंत निराकार आधार है।
मुख्य शिक्षाएं
- अस्तित्व में कोई ठोस पदार्थ, कारण, या प्रक्रिया नहीं है, इसलिए परमार्थतः संपूर्ण अस्तित्व शून्य है।
- अनुभवकर्ता स्वयं शून्य स्वरूप है, इसी शून्यता के कारण वह संपूर्ण दृश्य प्रपंच का साक्षी बन पाता है।
- शून्यता में ही अनंत संभावनाएं समाहित हैं; शून्य होने के कारण ही इसमें किसी भी प्रकार की नादरचना या मायावी अनुभव प्रकट हो सकता है।
- ज्ञानमार्ग के अनुसार, शून्य ही अंतिम और एकमात्र सत्य है। जो बौद्धिक रूप से इसे जान जाता है, वह समस्त मानसिक विक्षेपों से मुक्त हो जाता है।