जब अनुभव और अनुभवकर्ता के बीच का भेद मौजूद नहीं है, तो केवल अनुभवक्रिया बचती है। अनुभवक्रिया अस्तित्व का ही एक नाम है।
मुख्य शिक्षाएं
- अनुभव और अनुभवकर्ता एक सिक्के के दो पहलू हैं - दोनों हमेशा साथ पाए जाते हैं।
- चित्त या बुद्धि द्वारा किया गया यह विभाजन केवल विश्लेषण के लिए है। वास्तविकता में केवल दृष्टि है, न कोई दृष्टा, न दृश्य।
- इस एकता को समझना ही ब्रह्मज्ञान है।
- अनुभवक्रिया अस्तित्व का वर्णन करने का एक तरीका है - जहां द्वैत समाप्त हो जाता है।