परिभाषा
- दृश्य वह सब कुछ है जो प्रकट है, जिसका अनुभव किया जा सकता है, या जो किसी भी रूप में प्रतीति का विषय बनता है।
- ज्ञानमार्ग पर, दृश्य को अनुभव की श्रेणी में रखा जाता है जो कि परिवर्तनशील होने के कारण असत्य है।
मुख्य शिक्षाएं
- जो भी इंद्रियों द्वारा देखा, सुना, चखा, सूंघा या स्पर्श किया जा सकता है, वह सब दृश्य है। यहाँ तक कि मन में उठने वाले विचार, भावनाएं, कल्पनाएं और अहम् भी दृश्य ही हैं क्योंकि उनका प्रत्यक्ष अनुभव होता है।
- दृश्य का परम स्वभाव निरंतर परिवर्तनशीलता है, इसलिए सत्य के कठोरतम मानदंड के अनुसार संपूर्ण दृश्य प्रपंच असत्य (मिथ्या या माया) है।
- दृश्य कभी स्वयं को नहीं देख सकता; इसके अस्तित्व को प्रमाणित होने के लिए एक नित्य और अचल दृष्टा (अनुभवकर्ता) का होना अनिवार्य है।
- दृश्य-दृष्टा विवेक के द्वारा साधक स्वयं को दृश्य की सीमाओं (शरीर और मन) से मुक्त कर के शुद्ध दृष्टा भाव में अवस्थित करता है।