अस्तित्व का मूल तत्व
अनुभवकर्ता है , जो
शून्यता मात्र है। अस्तित्व किसी बाह्य पदार्थ या भौतिक-अभौतिक कच्चे माल से नहीं बना है।
मुख्य शिक्षाएं
- अस्तित्व का कोई ठोस आधार या भौतिक घटक नहीं है, इसलिए इसका तत्व शून्य है।
- द्वैत के स्तर पर, अस्तित्व केवल अनुभव और अनुभवकर्ता के रूप में विभाजित प्रतीत होता है। इनमें से जब परिवर्तनशील अनुभव (जो कि असत्य है) को हटा दिया जाता है, तो अस्तित्व का तत्व केवल अनुभवकर्ता ही बचता है।
- शून्यता का अर्थ पूर्ण अभाव नहीं है, बल्कि यह वह निराकार आधार है जिसमें अनंत संभावना और संपूर्णता समाहित है।
- अस्तित्व का तत्व अपरिवर्तनीय और नित्य है; जो बदलता है वह तत्व नहीं, बल्कि नामरूप है।
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