परिभाषा
- ज्ञानमीमांसा दर्शनशास्त्र की वह शाखा है जो ज्ञान के मूल स्वरूप, उसकी प्राप्ति के साधनों, उसकी सत्यता के मापदंडों और उसकी सीमाओं का व्यवस्थित विश्लेषण करती है।
- यह मूलतः इस प्रश्न का तार्किक उत्तर खोजती है कि 'हम कैसे जानते हैं और हमारे जानने के साधनों की प्रामाणिकता क्या है?'
मुख्य शिक्षाएं
- ज्ञानमार्ग की ज्ञानमीमांसा केवल दो ही ज्ञान के साधनों को सर्वमान्य मानती है: अपरोक्ष अनुभव और ठोस तर्क (अनुमान)। अन्य पारंपरिक साधनों (जैसे उपमा, अनुपलब्धता या शास्त्र वाक्य) का खंडन किया जाता है।
- इसके अनुसार, मात्र सूचना या शाब्दिक जानकारी ज्ञान नहीं है; जब तक किसी सूचना को प्रयोग द्वारा स्वयं के अनुभव में न उतारा जाए, वह अज्ञान या अंधविश्वास ही बनी रहती है।
- सत्य के निर्धारण के लिए इसकी ज्ञानमीमांसा का मापदंड बहुत कठोर है - 'जो अपरिवर्तनीय है केवल वही सत्य है, और जो परिवर्तनशील है वह असत्य (मिथ्या) है'।
- चूंकि संपूर्ण अनुभव चित्त और इंद्रियों द्वारा ही संसाधित होता है, इसलिए प्रामाणिक ज्ञान की प्राप्ति के लिए चित्तशुद्धि और बुद्धिशुद्धि को अनिवार्य उपकरण माना गया है।