परिभाषा
- निद्रा (नींद या सुषुप्ति) चित्त की वह विशेष चित्तवृत्ति या अवस्था है जिसमें बाह्य इंद्रियों की गतिविधियां और जागतिक अनुभवों का लोप हो जाता है।
- ज्ञानमार्ग पर, निद्रा को अनुभव के लोप होने और शून्यता का एक अनुभव माना जाता है।
मुख्य शिक्षाएं
- निद्रा चित्त की एक वृत्ति है; जब शरीर और मन थक जाते हैं, तब विश्राम के लिए निद्रा स्वतः ही घटित होती है।
- सुषुप्ति अवस्था में निद्रा गहरी होती है, जहाँ कोई स्वप्न नहीं होता, केवल अज्ञान के बीज रूप में शून्यता का अनुभव होता है।
- निद्रा भी एक प्रकार का अनुभव है (स्मृति का लोप हो जाना और शून्यता का अनुभव), क्योंकि जागने पर व्यक्ति को यह स्मरण रहता है कि 'मैं गहरी नींद में सुख से सोया था'।
- अनुभवकर्ता निद्रा, जागृत और स्वप्न तीनों अवस्थाओं का अचल साक्षी है; वह नींद में भी अप्रकट रूप से सदा चैतन्य रहता है।
- ज्ञानी और योगी की निद्रा सामान्य व्यक्ति जैसी अंधकारमय नहीं होती; उनकी निद्रा में भी सजगता बनी रहती है, जिसे योगनिद्रा या सहज समाधि की स्थिति कहा जाता है।