परिभाषा
- निर्वाण जीव की वह परम विमुक्ति की अवस्था है जिसमें व्यक्ति का भ्रामक मनुष्य जीवन, कर्तापन का अहंकार और जन्म-मृत्यु का चक्र सदा के लिए शांत हो जाता है।
- ज्ञानमार्ग के अनुसार, निर्वाण मनुष्य योनि में आने का वास्तविक और सर्वोच्च लक्ष्य है।
मुख्य शिक्षाएं
- निर्वाण का शाब्दिक अर्थ है— अज्ञान की आग का बुझ जाना; जब जीव में सीखने का चक्र पूर्ण हो जाता है, तो उसका निर्वाण हो जाता है।
- निर्वाण मोक्ष या परम मुक्ति का ही पर्यायवाची है, जहाँ जीव के सभी पुराने कर्म बंधन और वासनाएं विलीन हो जाती हैं।
- यह अवस्था किसी बाह्य क्रिया या तपस्या से प्राप्त नहीं होती, बल्कि केवल आत्मज्ञान के प्रकाश में अज्ञान के समूल नाश से स्वतः ही उपलब्ध होती है।
- निर्वाण में 'व्यक्ति' का कृत्रिम अस्तित्व पूरी तरह मिट जाता है और केवल अखंड अनुभवकर्ता या ब्रह्म ही शेष रहता है।