परिभाषा
- न्यूनतावाद (या अतिसूक्ष्मवादी होना) अपनी भौतिक और मानसिक आवश्यकताओं को न्यूनतम करके केवल परम आवश्यक वस्तुओं और गतिविधियों के साथ जीवन जीने का विवेकपूर्ण दृष्टिकोण है।
- ज्ञानमार्ग पर यह साधक की एक मुख्य पहचान और वैराग्य का सबसे व्यावहारिक रूप है।
मुख्य शिक्षाएं
- न्यूनतावाद का अर्थ कंजूसी करना नहीं है, बल्कि जो सच में आवश्यक है उसका आदरपूर्वक उपयोग करना और व्यर्थ की विलासिताओं, व्यसनों व अनुपयोगी संबंधों का स्वेच्छा से त्याग करना है।
- सांसारिक वस्तुओं, संबंधों और बाह्य कोलाहल का मानसिक बोझ कम करने से चित्त शांत होता है, ध्यान के विक्षेप दूर होते हैं और मनन के लिए प्रचुर समय मिलता है।
- न्यूनतावाद जीवन को अधिक सुसंगत, सुंदर और ज्ञान के प्रकाश से परिपूर्ण बनाता है; क्योंकि अज्ञानी व्यक्ति सदा संचय और भोग में लगा रहता है जबकि साधक त्याग की महिमा समझता है।
- यह जीवनशैली साधक को अहंकार और उत्तरजीविता के अनावश्यक प्रपंचों से मुक्त कर के परम संतोषभाव प्रदान करती है।