परिभाषा
- प्रकृति (या शक्ति) अस्तित्व का वह अत्यंत क्रियाशील, गतिशील और परिवर्तनशील आयाम है जो संपूर्ण दृश्य प्रपंच और अनुभव का सृजन करता है।
- प्राचीन काल में माया को ही प्रकृति, शक्ति या देवी कहा गया है जो समस्त इंद्रियजनित अनुभवों को जन्म देती है।
मुख्य शिक्षाएं
- प्रकृति स्वयं में जड़ (अचेतन) है, परंतु यह नित्य चेतना यानी अनुभवकर्ता के प्रकाश में आकर पूरी तरह जीवंत, सत्य और सक्रिय प्रतीत होती है।
- संपूर्ण जागतिक नियम, चक्रीय प्रक्रियाएं, नश्वरता और जीवों का विकासक्रम प्रकृति (माया) के ही सहज खेल हैं जो स्वतः ही संचालित होते हैं।
- प्रकृति में ही साधक के शुद्धिकरण और अज्ञान के नाश की प्रयोगात्मक व्यवस्था भी समाहित है; इसकी शक्तियों की आराधना या सही उपयोग से चित्त निर्मल हो जाता है।
- ज्ञानमार्ग पर प्रकृति को किसी बाह्य या भिन्न सत्ता के रूप में नहीं, बल्कि स्वयं के ही मिथ्या प्रतिबिंब (संभावनाओं के अनंत विस्तार) के रूप में जाना जाता है।