मूल अज्ञान


परिभाषा

  • इसके साथ ही, परिवर्तनशील माया को यथार्थ और सत्य मान लेना ही मूल अज्ञान कहलाता है।

मुख्य शिक्षाएं

  • मूल अज्ञान ही जीव के सभी सांसारिक बंधनों, भयों, वासनाओं और दुखों का आदि कारण है।
  • इसके कारण जीव स्वयं को जन्म, बुढ़ापे और मृत्यु के अधीन मानकर निरंतर भयभीत रहता है, जबकि उसका वास्तविक स्वरूप सर्वथा अजन्मा और अमर है।
  • मनुष्य समाज में उत्पन्न होते ही मतारोपण का दास बन जाता है कि 'मैं यह शरीर हूँ और बाह्य वस्तुएं ही मेरे सुख का एकमात्र साधन हैं'।

देखें


Edit This Article History