परिभाषा
- ज्ञानमार्ग के अनुसार, मृत्यु केवल शरीर और इंद्रियों की एक नश्वर घटना है, अनुभवकर्ता की नहीं।
मुख्य शिक्षाएं
- अज्ञान के कारण जीव स्वयं को शरीर मान लेता है, जिससे उसमें मृत्यु का सबसे बड़ा भय (मृत्युभय) उत्पन्न होता है।
- अनुभवकर्ता सदा नित्य, शाश्वत और काल से परे है; उसका कभी कोई अंत, क्षय या नाश नहीं हो सकता।
- मृत्यु और जन्म माया के चक्रीय प्रवाह के अंतर्गत आने वाले केवल भ्रामक परिवर्तन हैं। यथार्थ में, अस्तित्व में कुछ भी उत्पन्न या नष्ट नहीं होता, केवल रूप बदलता है।
- आत्मज्ञान होने पर जब देह से आसक्ति टूट जाती है, तब मृत्यु का भय सदा के लिए समाप्त हो जाता है और साधक शांत भाव से शरीर के छूटने (निर्वाण) को देखता है।