साक्षीभाव (संस्कृत: साक्षीभाव) अनुभवकर्ता की वह अवस्था है जिसमें वह बिना किसी भागीदारी के सभी अनुभवों को देखता है।
साक्षीभाव ज्ञानमार्ग की एक महत्वपूर्ण साधना है। इसमें व्यक्ति अनुभव और अनुभवकर्ता के भेद को समझता है।
साक्षीभाव निदिध्यासन का एक हिस्सा है।