परिभाषा
- बुद्धि चित्त का वह अत्यंत तीक्ष्ण, विवेकशील और तार्किक भाग है जिसका कार्य अनुभवों को व्यवस्थित करना, उनके बीच तार्किक संबंध स्थापित करना और सत्य-असत्य का भेद ('अर्थप्रकाशो बुद्धिः') करना है।
- ज्ञानमार्ग पर, बुद्धि चित्त की एक अत्यंत परिष्कृत परत है, जो अज्ञान के नाश के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपकरण सिद्ध होती है।
मुख्य शिक्षाएं
- बुद्धि स्वयं परिवर्तनशील होने के कारण एक सूक्ष्म अनुभव मात्र है; यह वास्तविक अनुभवकर्ता नहीं है, बल्कि अनुभवकर्ता द्वारा प्रकाशित होने वाली चित्त की एक श्रेष्ठ वृत्ति है।
- बुद्धि का संतुलित विकास होने पर ही साधक में प्रज्ञा और विवेक का उदय होता है, जो उसे सांसारिक पशुवृत्ति से ऊपर उठाकर आध्यात्मिक मार्ग की ओर प्रवृत्त करता है।
- बुद्धि स्वयं सीमित है, इसलिए इसके द्वारा प्राप्त होने वाला सकारात्मक ज्ञान भी सीमित होता है; परंतु अज्ञानपूर्ण मान्यताओं के समूल खंडन (नेति-नेति) के लिए बुद्धि ही सबसे तीक्ष्ण अस्त्र है।
- ज्ञानमार्ग का लक्ष्य बुद्धि में व्यर्थ की सूचनाओं को संचित करना नहीं है, बल्कि बुद्धि को अज्ञान से खाली करना है; बुद्धि के इसी समर्पण को अज्ञेयता या 'बुद्ध होना' कहा जाता है।