परिभाषा
- नादविज्ञान में नाद या स्मृति की संरचना।
- परत (या परतें) चित्त की बहुस्तरीय और श्रेणीबद्ध संरचना का एक विशिष्ट खंड या स्तर है, जिसमें नादरचनाएं अपनी जटिलता और वृत्तियों के अनुसार व्यवस्थित होती हैं।
- चित्त स्थूल से लेकर अत्यंत सूक्ष्म परतों का एक जटिल संगठन है।
मुख्य शिक्षाएं
- चित्त की संरचना मुख्य रूप से दस परतों में विभाजित है: संभावित चित्त, खनिजिक चित्त, वानस्पतिक चित्त, सरीसृप चित्त, स्तनपायी चित्त, मानव चित्त, बुद्धिमान चित्त, स्वचेतन चित्त, मुक्त चित्त और विलीन चित्त।
- प्रत्येक परत की अपनी विशिष्ट चित्तवृत्ति (गतिविधि) और अपनी सीमा की इंद्रियां होती हैं, जो जीव को उसके विकासक्रम के अनुसार अनुभव प्रदान करती हैं।
- जितनी निचली परत होती है वह उतनी ही अधिक नश्वर और स्थूल होती है, जबकि ऊपरी परतें (जैसे कारण शरीर या अव्यक्तिक स्मृति) अत्यंत सूक्ष्म, अर्धस्थायी और व्यापक होती हैं।
- जब साधक का ध्यान साधना के बल पर निचली स्थूल परतों से निवृत होकर ऊपरी सूक्ष्म परतों की ओर जाता है, तो उसे सिद्धियां, सूक्ष्म इंद्रियों का भान और साक्षीभाव प्राप्त होता है।