शुद्धिकरण


परिभाषा

  • ज्ञानमार्ग में यह चित्त को शांत और बुद्धि को एकाग्र करने की साधना है।

मुख्य शिक्षाएं

  • ज्ञानमार्ग पर शुद्धिकरण कोई हठपूर्वक की जाने वाली शारीरिक क्रिया या हठयोग नहीं है, बल्कि यह ज्ञान के प्रभाव से होने वाली स्वतःस्फूर्त आंतरिक शुद्धि है।
  • जब साधक का अज्ञान नष्ट होता है, तो उसकी बुद्धि शुद्ध हो जाती है और उसकी संकीर्ण वासनाएं, क्रोध, भय और राग-द्वेष स्वतः ही विलीन होने लगते हैं।
  • यदि साधक ज्ञान प्राप्त होने के बाद भी उसमें स्थिर नहीं रह पाता, तो आत्म-मूल्यांकन के द्वारा अशुद्धियों की पहचान करके गुरु के निर्देशन में शुद्धिकरण के उपाय किए जाते हैं।
  • पूर्ण शुद्धिकरण होने पर साधक का चित्त अद्वैत प्रेम और परम आनंद में प्रतिष्ठित हो जाता है।

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