परिभाषा
- ज्ञानमार्ग में इन अशुद्धियों को दूर करके चित्तशुद्धि प्राप्त की जाती है।
मुख्य शिक्षाएं
- चित्त की अशुद्धियां ही व्यक्ति को अज्ञान के अंधकार में बांधकर रखती हैं और उसे स्वयं को शरीर और मन समझने का भ्रम पैदा करती हैं।
- अशुद्धियों के कारण ही जीवन में दुःख, क्लेश, हिंसा, क्रोध, भय और अस्थिरता जैसे नकारात्मक भाव और अवांछित कर्म उत्पन्न होते हैं।
- ज्ञानमार्ग पर निरंतर इन अशुद्धियों को तलवार लेकर काट दिया जाता है; अशुद्धियों का विनाश ही वास्तविक चित्तशुद्धि और बुद्धिशुद्धि है।
- साधक में षट सम्पत्ति (शम, दम, उपरति, तितिक्षा, श्रद्धा, समाधान) और तीव्र जिज्ञासा होने से चित्त की अशुद्धियां दूर होती हैं।
- अशुद्धियों के बने रहने से साधना में विघ्न आते हैं और अज्ञान वापस लौट आता है। गुरु के मार्गदर्शन से इन अशुद्धियों की पहचान और निवारण सुलभ होता है।