अहंनाश


परिभाषा

  • अहंनाश (या अहम् का पूर्ण विनाश) अहम् ('मैं' और 'मेरा' की भावना) का पूर्ण विसर्जन है। यह आत्मज्ञान का सीधा परिणाम है, जिसमें भ्रामक और परिवर्तनशील व्यक्तित्व का लोप होकर केवल वास्तविक स्वरूप अनुभवकर्ता या अस्तित्व ही शेष रहता है।

मुख्य शिक्षाएं

  • अहंकार कोई वास्तविक वस्तु नहीं है, बल्कि चित्त की एक ऐसी प्रक्रिया है जो अज्ञानवश स्वयं को शरीर और मन मान बैठती है।
  • आत्मज्ञान के प्रकाश में जब यह प्रत्यक्ष हो जाता है कि 'मैं' कोई भी परिवर्तनशील अनुभव (शरीर, मन या संबंध) नहीं हूँ, तब अहम् का आधार समाप्त हो जाता है और अहंनाश घटित होता है।
  • अहंनाश का अर्थ जैविक शरीर या व्यक्तित्व का भौतिक विनाश नहीं है; इसका अर्थ केवल 'मैं' और 'मेरा' के भ्रामक मानसिक स्वामित्व का अंत है। इसके बाद भी शरीर एक यंत्र की भांति उत्तरजीविता के लिए सहजता से कार्य करता रहता है।
  • यह जीवनमुक्त की वह परम अवस्था है जहाँ साधक कर्तापन के भाव से मुक्त होकर केवल एक निष्काम साक्षी या अनुभवकर्ता के रूप में आनंदपूर्वक जीवन जीता है।

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