उपरति


उपरति षट सम्पत्ति का चौथा गुण है - कर्मों का त्याग, अनावश्यक क्रियाकलापों से विरत होना।

मुख्य शिक्षाएं

  • यह शम (मन की शांति) और दम (इंद्रिय-नियंत्रण) के बाद आता है - जब मन और इंद्रियां शांत हो जाती हैं, तब उपरति स्वतः उत्पन्न होती है।

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