चक्रीय


चक्रीय परिवर्तन का वह रूप है जो चक्र में दोहराता है। नादविज्ञान में चक्रीय परिवर्तन माया का लक्षण है।

मुख्य शिक्षाएं

  • चक्रीय परिवर्तन का अर्थ है एक ही रचना की पुनरावृत्ति।
  • इससे नियमों का भ्रम उत्पन्न होता है ।
  • चक्रीय परिवर्तन अनित्य है - वह सत्य नहीं हो सकता, क्योंकि वह बदलता है।
  • मोक्ष चक्रीय बंधन से मुक्ति है - चक्र के बाहर निकलना।

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