परिभाषा
- तर्क (या अनुमान) चित्त में चलने वाली वह बौद्धिक चित्तवृत्ति है जिसके द्वारा अनुभवों में भेद किया जाता है, विवेक का प्रयोग होता है और पूर्व अनुभवों के आधार पर परिणामों का पूर्वानुमान लगाया जाता है।
- ज्ञानमार्ग पर तर्क को अपरोक्ष अनुभव के साथ ज्ञानार्जन का दूसरा अनिवार्य और सर्वमान्य साधन (प्रमाण) माना गया है।
मुख्य शिक्षाएं
- तर्क का कार्य केवल अमूर्त मानसिक व्यायाम करना नहीं है, बल्कि तर्क पूरी तरह से ठोस और अपरोक्ष अनुभव पर ही आधारित होना चाहिए।
- जो तर्क प्रत्यक्ष अनुभवों से नहीं जुड़ता, वह केवल भ्रामक कल्पनाओं और अज्ञान को जन्म देता है (जैसे उड़ने वाले हाथी का अतार्किक उदाहरण)।
- तार्किक क्षमता के द्वारा ही साधक अंधविश्वासों, आरोपित मतारोपणों और पुरानी मान्यताओं को नेति-नेति (यह नहीं, वह नहीं) विधि से काटकर सत्य के शिखर तक पहुँचता है।
- बुद्धिमान जीवों में तर्क की क्षमता अधिक होती है। तर्क के नियम अंततः माया की नियमबद्धता और कलनीयता को समझने तथा विज्ञान के सिद्धांतों को जन्म देने में परम सहायक होते हैं।