परिभाषा
- नाम और रूप (या नामरूप) अस्तित्व के अचल तत्व पर इंद्रियों और चित्त द्वारा आरोपित की गई वह परिवर्तनशील, अनित्य और बाह्य आकृति है जो प्रतीति मात्र है।
- नामरूप माया की मूल श्रेणियां हैं, जिनके अंतर्गत इंद्रियों द्वारा समस्त अनुभव गढ़े जाते हैं।
मुख्य शिक्षाएं
- संसार की सभी दृश्य वस्तुएं केवल नामरूप हैं (नाम उनकी सामाजिक पहचान है और रूप उनका आकार है), जिनका अपना कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं होता।
- नामरूप पूरी तरह से परिवर्तनशील और अनित्य हैं, इसलिए सत्य के कठोरतम मानदंड के अनुसार वे असत्य (मिथ्या) या माया कहलाते हैं।
- उदाहरण के लिए, आभूषण केवल सोने का नामरूप है; आभूषण का आकार नष्ट होने पर भी उसका मूल तत्व 'स्वर्ण' सदा अपरिवर्तित रहता है।
- ज्ञानमार्ग में नामरूप के इस भ्रामक आवरण को भेदकर उसके पीछे छिपे नित्य तत्व को जानना ही वास्तविक विवेक है। अनुभवकर्ता नामरूप के इस प्रपंच से सर्वथा परे निर्गुण और निराकार है।