परिभाषा
- अव्यक्तिक स्मृति क्षेत्र चित्त की एक अत्यंत सूक्ष्म और उच्चतर परत है, जहां व्यक्तिनिष्ठता और व्यक्तिगत पहचान समाप्त हो जाती है।
- यह जीवस्मृति और कारणस्मृति (कारण शरीर) से बहुत विशाल और व्यापक स्मृति का क्षेत्र है जो विश्वस्मृति का हिस्सा है।
मुख्य शिक्षाएं
- व्यक्तिगत स्मृति शरीर और मन से जुड़ी होती है, जबकि अव्यक्तिक स्मृति क्षेत्र अस्तित्व के व्यापक स्तर पर होता है।
- मुक्त चित्त की अवस्था में साधक का ध्यान व्यक्तिगत सीमाओं को पार करके इस अव्यक्तिक स्मृति क्षेत्र तक विस्तारित हो जाता है।
- यहाँ व्यक्तिगत कर्म बंधनों का लोप हो जाता है और केवल शुद्ध स्मृति संरचनाएं ही शेष रहती हैं।