परिभाषा
- वृत्ति (या चित्तवृत्ति) चित्त में चलने वाली उन क्रमबद्ध, चक्रीय और नियमबद्ध प्रक्रियाओं का समूह है जो स्वयं को बार-बार वृत्त (घेरे) में दोहराती हैं।
- वृत्ति ही हमारे संपूर्ण अनुभव और आचरण को आकार देती है।
मुख्य शिक्षाएं
- वृत्ति कभी पूरी तरह नहीं रुकती क्योंकि यह नाद (परिवर्तन) पर आधारित है। हाँ, चेतना और साक्षीभाव के द्वारा इसके वेग को अत्यंत मंद या नियंत्रित अवश्य किया जा सकता है।
- चित्त की वृत्तियों को उनके विकासक्रम के अनुसार वर्गीकृत किया गया है: पशुवृत्ति (उत्तरजीविता की), भोग वृत्ति (इंद्रिय सुख की), जाति वृत्ति (झुंड की), भाव वृत्ति (भावनाओं की), बौद्धिक वृत्ति, और आध्यात्मिक वृत्ति।
- सांसारिक जीवन में जीव अपनी वृत्तियों का दास होता है, जबकि ज्ञानमार्ग का साधक वृत्तियों का दृष्टा बनकर उनसे अनासक्त होना सीखता है।
- जागृत अवस्था में चित्त में उठने वाली अज्ञानपूर्ण वृत्तियों और इच्छाओं को ही वास्तव में कर्म (संस्कार) कहा जाता है।