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चक्रीय
चक्रीय
परिवर्तन
का वह रूप है जो
चक्र
में दोहराता है।
नादविज्ञान
में चक्रीय परिवर्तन
माया
का लक्षण है।
मुख्य शिक्षाएं
चक्रीय परिवर्तन का अर्थ है एक ही
रचना
की पुनरावृत्ति।
इससे
नियम
ों का भ्रम उत्पन्न होता है ।
प्रकृति
में अनेक चक्र हैं -
दिन-रात
,
ऋतु
,
जन्म-मृत्यु
।
चक्रीय परिवर्तन
अनित्य
है - वह
सत्य
नहीं हो सकता, क्योंकि वह बदलता है।
मोक्ष
चक्रीय बंधन से मुक्ति है - चक्र के बाहर निकलना।
देखें
चक्र
परिवर्तन
रचना
नाद
मोक्ष
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