नैतिकता


परिभाषा

  • नैतिकता सही और गलत कर्मों के निर्धारण का वह सिद्धांत है जो चित्त के नियमों और विवेक पर आधारित होता है।
  • ज्ञानमार्ग के अनुसार, संपूर्णता का आदर करना और अहिंसा का पालन करना ही वास्तविक और परम नैतिकता है।

मुख्य शिक्षाएं

  • नैतिकता दो प्रकार की होती है: 'सार्वभौमिक नैतिकता' (जो सभी कालों और संस्कृतियों में समान रहती है, जैसे जीवन रक्षा व अहिंसा) और 'व्यक्तिपरक नैतिकता' (जो समाज, धर्म, देश और परंपराओं द्वारा कल्पित की जाती है और बदलती रहती है)।
  • चूंकि व्यक्तिपरक नैतिकता समय और परिस्थितियों के साथ बदलती रहती है, इसलिए इसे सत्य के मापदंड पर असत्य (मिथ्या) माना जाता है।
  • ज्ञानमार्ग पर किसी प्रकार की बनावटी नैतिकता थोपी नहीं जाती; अज्ञान का नाश होने पर जब साधक की बुद्धि शुद्ध होती है, तो उसके कर्म स्वतः ही उत्तम, अहिंसक और कल्याणकारी हो जाते हैं।
  • जब साधक यह जान लेता है कि सभी जीवों का तत्व एक ही है, तो किसी को दुःख न पहुँचाना (अहिंसा) उसका सहज स्वभाव बन जाता है।

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