भाव वृत्ति


परिभाषा

  • भाव वृत्ति (या भाववृत्ति) चित्त की वह संवेदनात्मक और भावनात्मक वृत्ति या अवस्था है जिसमें जीव का सुख, दुःख, निर्णय और संपूर्ण जीवन मुख्य रूप से भावनाओं (जैसे राग, द्वेष, भय, संवेग) द्वारा संचालित होता है।
  • यह स्तनपायी और मानव चित्त के विकास की एक विशिष्ट परत है।

मुख्य शिक्षाएं

  • भाव वृत्ति के अंतर्गत प्रेम, क्रोध, भय, दुःख, प्रसन्नता और आनंद जैसी भावनाएं आती हैं; जो जीव के शरीर और आचरण को सीधे प्रभावित करती हैं।
  • ज्ञानमार्ग के अनुसार, भाव वृत्ति पूरी तरह परिवर्तनशील और क्षणभंगुर है, अतः यह असत्य (माया) है। जो व्यक्ति भावनाओं के अधीन रहता है, वह सांसारिक बंधनों में जकड़ा रहता है।
  • साधक को अपनी भाव वृत्तियों के प्रति पूरी तरह सचेत रहना चाहिए — न तो इनमें बहना है और न ही इनका दमन करना है, बल्कि केवल अनासक्ति और समता विकसित करनी है।
  • आत्मज्ञान होने पर भाव वृत्तियां पूरी तरह समाप्त नहीं होतीं, परंतु वे बुद्धि और विवेक के नियंत्रण में आ जाती हैं, जिससे जीवन में साक्षीभाव बना रहता है।

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