परिभाषा
- भौतिकवाद वह संकुचित और अज्ञानपूर्ण दृष्टिकोण है जो केवल इंद्रिय-गोचर बाह्य वस्तुओं, सुख-सुविधाओं और शरीर को ही एकमात्र यथार्थ और सत्य मानता है।
- यह अध्यात्म के सर्वथा विपरीत और सांसारिक उत्तरजीविता की वृत्ति से उत्पन्न होने वाला अज्ञान है।
मुख्य शिक्षाएं
- भौतिकवादी व्यक्ति के लिए सत्य का केवल एक ही हीन मानदंड होता है—'सर्वसम्मति वास्तविकता' (जो सबको दिख रहा है वही सच है)। वह इसके पार देखने के लिए कभी राजी नहीं होता।
- यह दृष्टिकोण मृत्यु के गहरे भय और अज्ञान से उत्पन्न होता है; क्योंकि भौतिकवादी केवल शरीर की उत्तरजीविता और इंद्रिय भोगों को ही जीवन का परम लक्ष्य मान लेता है।
- ज्ञानमार्ग के अनुसार, भौतिकवादी व्यक्ति तत्वज्ञान के सर्वथा अनुपयुक्त है; क्योंकि जब तक व्यक्ति दृश्य वस्तुओं और शरीर की सीमाओं से ऊपर उठने को तैयार नहीं होता, तब तक उसे आत्मज्ञान नहीं हो सकता।
- यथार्थ में, भौतिक संसार स्वयं चित्त द्वारा गढी गई एक भ्रामक नादरचना (माया) मात्र है जिसका कोई स्वतंत्र अस्तित्व नहीं है।