परिभाषा
- सांख्य भारतीय दर्शन की वह अत्यंत प्राचीन और तर्कसंगत शाखा है जो सृष्टि का संपूर्ण विकासक्रम पुरुष (चेतना) और प्रकृति (जड़) के द्वैत के आधार पर समझाती है।
- यह ज्ञान को ही मुक्ति का एकमात्र वास्तविक मार्ग मानती है।
मुख्य शिक्षाएं
- सांख्य दर्शन के अनुसार, संपूर्ण अनुभव बाह्य वस्तुओं का नहीं बल्कि इंद्रियों द्वारा ग्रहण की गई तन्मात्रा का ही होता है।
- यह जगत के निर्माण और विकासक्रम को समझाने के लिए त्रिगुण (सत्त्व, रजस, तमस) और २४ मुख्य तत्वों (जैसे महत्/बुद्धि, अहंकार, मन, पंचमहाभूत) की परिकल्पना करता है।
- सांख्य मूलतः द्वैतवादी दर्शन है जो पुरुष और प्रकृति को सर्वथा पृथक मानता है; जबकि ज्ञानमार्ग अद्वैतवादी है जहाँ पुरुष और प्रकृति एक ही अस्तित्व के दो आयाम हैं।
- ज्ञानमार्ग सांख्य की तार्किक प्रणालियों, तत्वों के वर्गीकरण और विवेक के महत्व को पूरी तरह स्वीकार करता है।