परिभाषा
- स्मरण (या याद करना) स्मृति में संचित पुरानी नादरचनाओं की प्रतिलिपि (प्रतिकृति) बनाकर उन्हें पुनः चैतन्य पटल पर सक्रिय करने की एक मानसिक प्रक्रिया है।
- ज्ञानमार्ग की साधना में स्मरण का अर्थ वर्तमान में साक्षी बने रहना है।
मुख्य शिक्षाएं
- व्यावहारिक स्तर पर, स्मरण का अर्थ पुरानी संचित घटनाओं को याद करना है, लेकिन इससे मूल नादरचना का नाश नहीं होता; यह केवल उसकी एक पुनरावृत्ति है।
- ज्ञानमार्ग की साधना में स्मरण का अर्थ स्मृति की पुरानी घटनाओं को टटोलना नहीं है, बल्कि चिह्नों का उपयोग करके तत्क्षण अपने वास्तविक सत्य स्वरूप अनुभवकर्ता में लौट आना है।
- अनुभवकर्ता स्वयं स्मृति में नहीं मिलता, वह साक्षात् अभी वर्तमान में है; इसलिए स्मरण का वास्तविक अर्थ वर्तमान क्षण में साक्षीभाव में अवस्थित रहना है।
- सदा साक्षीभाव का स्मरण रखने से जीव का अज्ञान नष्ट होता है और वह भ्रामक बंधनों से मुक्त हो जाता है।