परिभाषा
- स्वतंत्रता चित्त की वह बंधनमुक्त, अचल और असीमित अवस्था है जो सभी प्रकार के अज्ञान, भ्रामक मान्यताओं, वासनाओं और आसक्तियों के नष्ट होने पर स्वतः प्रकाशित होती है।
- ज्ञानमार्ग पर अज्ञान का नाश ही वास्तविक स्वतंत्रता है।
मुख्य शिक्षाएं
- सच्ची स्वतंत्रता किसी भी प्रकार की इच्छाओं, वासनाओं और पसंद-नापसंद के अधीन न होने में है; इच्छाओं का सर्वथा अभाव ही वास्तविक स्वतंत्रता है।
- अज्ञेयवाद के धरातल पर पहुँचकर जब साधक सभी प्रकार के दर्शनों, मतों और ज्ञान के अभिमान को भी त्याग देता है, तब उसे संपूर्ण और असीम स्वतंत्रता प्राप्त होती है।
- स्वतंत्रता और अनुशासन एक दूसरे के पूरक हैं; अनुशासित बुद्धि ही अज्ञान के बंधनों को काटकर परम स्वतंत्रता (मुक्ति) की ओर ले जाती है।
- जब साधक यह जान लेता है कि 'मैं अखंड अनुभवकर्ता हूँ', तो वह इस संसार के सभी नियमों और बंधनों से सदा के लिए स्वतंत्र हो जाता है।